वैदिक ज्योतिष की 12 राशियाँ

वैदिक ज्योतिष में आपकी राशि का अर्थ है चंद्र राशि, यानी जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था, और इसे मन तथा भावनाओं का दर्पण माना जाता है। नीचे मेष से मीन तक बारहों राशियों के अलग-अलग लेख हैं, जिनमें स्वामी ग्रह, तत्व, स्वभाव, नक्षत्र, नाम अक्षर, प्रेम, करियर और अनुकूल राशियों की चर्चा है। अपनी राशि चुनकर पूरा परिचय पढ़ें। राशि पता न हो, तो नीचे दिए तरीकों से पहचानें या मुफ्त जन्म कुंडली बनाकर तुरंत देखें।

मेष

स्वामी ग्रह: मंगल · तत्व: अग्नि

नक्षत्र (पद): अश्विनी (1–4), भरणी (1–4), कृत्तिका (1)

नाम अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष राशि का स्वभाव पढ़ें

वृषभ

स्वामी ग्रह: शुक्र · तत्व: पृथ्वी

नक्षत्र (पद): कृत्तिका (2–4), रोहिणी (1–4), मृगशिरा (1–2)

नाम अक्षर: इ, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

वृषभ राशि का स्वभाव पढ़ें

मिथुन

स्वामी ग्रह: बुध · तत्व: वायु

नक्षत्र (पद): मृगशिरा (3–4), आर्द्रा (1–4), पुनर्वसु (1–3)

नाम अक्षर: का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा

मिथुन राशि का स्वभाव पढ़ें

कर्क

स्वामी ग्रह: चंद्र · तत्व: जल

नक्षत्र (पद): पुनर्वसु (4), पुष्य (1–4), आश्लेषा (1–4)

नाम अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

कर्क राशि का स्वभाव पढ़ें

सिंह

स्वामी ग्रह: सूर्य · तत्व: अग्नि

नक्षत्र (पद): मघा (1–4), पूर्वा फाल्गुनी (1–4), उत्तरा फाल्गुनी (1)

नाम अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

सिंह राशि का स्वभाव पढ़ें

कन्या

स्वामी ग्रह: बुध · तत्व: पृथ्वी

नक्षत्र (पद): उत्तरा फाल्गुनी (2–4), हस्त (1–4), चित्रा (1–2)

नाम अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या राशि का स्वभाव पढ़ें

तुला

स्वामी ग्रह: शुक्र · तत्व: वायु

नक्षत्र (पद): चित्रा (3–4), स्वाति (1–4), विशाखा (1–3)

नाम अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला राशि का स्वभाव पढ़ें

धनु

स्वामी ग्रह: गुरु · तत्व: अग्नि

नक्षत्र (पद): मूल (1–4), पूर्वाषाढ़ा (1–4), उत्तराषाढ़ा (1)

नाम अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

धनु राशि का स्वभाव पढ़ें

मकर

स्वामी ग्रह: शनि · तत्व: पृथ्वी

नक्षत्र (पद): उत्तराषाढ़ा (2–4), श्रवण (1–4), धनिष्ठा (1–2)

नाम अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर राशि का स्वभाव पढ़ें

कुंभ

स्वामी ग्रह: शनि · तत्व: वायु

नक्षत्र (पद): धनिष्ठा (3–4), शतभिषा (1–4), पूर्वा भाद्रपद (1–3)

नाम अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

कुंभ राशि का स्वभाव पढ़ें

मीन

स्वामी ग्रह: गुरु · तत्व: जल

नक्षत्र (पद): पूर्वा भाद्रपद (4), उत्तरा भाद्रपद (1–4), रेवती (1–4)

नाम अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

मीन राशि का स्वभाव पढ़ें

राशि क्या है: चंद्र राशि, सूर्य राशि और निरयन राशिचक्र

सूर्य के वार्षिक मार्ग के आसपास की आकाशीय पट्टी को 360 अंशों का राशिचक्र माना जाता है, जिसे 30-30 अंशों के बारह हिस्सों में बाँटा गया है। हर हिस्सा एक राशि है। पश्चिमी ज्योतिष में लोग प्रायः सूर्य राशि से अपनी पहचान बताते हैं, जो जन्म की तारीख से तय होती है। वैदिक परंपरा में व्यक्तिगत राशि चंद्र राशि होती है, क्योंकि चंद्र को मन, भावनाओं और रोजमर्रा की प्रतिक्रियाओं का कारक माना गया है। दूसरा बड़ा अंतर गणना का है। पश्चिमी पद्धति सायन राशिचक्र अपनाती है, जबकि भारतीय ज्योतिष तारों पर टिका निरयन राशिचक्र इस्तेमाल करता है। दोनों के बीच का अंतर अयनांश कहलाता है, जो आज लगभग 24 अंश है। भारत की कैलेंडर सुधार समिति द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी अयनांश सबसे प्रचलित है, और इस साइट की सभी गणनाएँ इसी पर आधारित हैं।

अपनी राशि कैसे जानें: जन्म कुंडली और नाम अक्षर

सबसे सटीक तरीका जन्म कुंडली है, जिसके लिए जन्म तिथि, समय और स्थान चाहिए। चंद्र लगभग सवा दो दिन में एक राशि पार कर लेता है, इसलिए केवल तारीख से हमेशा राशि तय नहीं होती; जिस दिन चंद्र राशि बदल रहा हो, उस दिन कुछ घंटों का फर्क भी परिणाम बदल देता है। इस साइट की मुफ्त कुंडली चंद्र राशि, नक्षत्र-पद और लग्न एक साथ दिखाती है। दूसरा पारंपरिक तरीका नाम अक्षर का है। हर नक्षत्र के चार पदों को एक-एक अक्षर दिया गया है, और कई परिवार शिशु का नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से रखते हैं। ऐसे नामों में पहला अक्षर राशि की ओर इशारा करता है। पर अगर नाम इस नियम से नहीं रखा गया, तो नाम से निकली राशि वास्तविक चंद्र राशि से अलग हो सकती है, इसलिए उसे केवल अनुमान मानें।

तत्व और स्वभाव: चार तत्व और चर, स्थिर, द्विस्वभाव राशियाँ

राशियों को समझने का पहला आधार तत्व है। अग्नि तत्व की राशियाँ मेष, सिंह और धनु उत्साह, साहस और पहल से जुड़ी हैं। पृथ्वी तत्व की वृषभ, कन्या और मकर व्यावहारिक, धैर्यवान और ठोस परिणाम चाहने वाली मानी जाती हैं। वायु तत्व की मिथुन, तुला और कुंभ विचार, संवाद और मेलजोल को महत्व देती हैं। जल तत्व की कर्क, वृश्चिक और मीन गहरी भावनाओं, अंतर्ज्ञान और सहानुभूति की प्रतीक हैं। दूसरा आधार राशि की प्रकृति है। चर राशियाँ मेष, कर्क, तुला और मकर गति और नई शुरुआत पसंद करती हैं। स्थिर राशियाँ वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ टिकाऊपन और दृढ़ता दिखाती हैं। द्विस्वभाव राशियाँ मिथुन, कन्या, धनु और मीन लचीली होती हैं और परिस्थिति के अनुसार ढल जाती हैं। तत्व और प्रकृति मिलकर राशि की मूल छवि बनाते हैं, जिसे स्वामी ग्रह और पूरी कुंडली आगे रंग देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैदिक और पश्चिमी राशि में अंतर क्यों होता है?

इसके दो कारण हैं। पहला, वैदिक ज्योतिष व्यक्ति की राशि चंद्र से देखता है, जबकि पश्चिमी पद्धति सूर्य से। दूसरा, भारतीय गणना निरयन राशिचक्र पर होती है, जो आज सायन राशिचक्र से लगभग 24 अंश पीछे है। इसलिए एक ही व्यक्ति की पश्चिमी सूर्य राशि, निरयन सूर्य राशि और चंद्र राशि तीनों अलग हो सकती हैं, और इसमें कोई गलती नहीं है।

क्या नाम के पहले अक्षर से राशि सही पता चलती है?

तभी, जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर के अनुसार रखा गया हो। नाम अक्षर की परंपरा में हर नक्षत्र पद का एक अक्षर तय है, इसलिए ऐसे नाम से चंद्र राशि का ठीक अनुमान मिल जाता है। यदि नाम पसंद या पारिवारिक कारणों से चुना गया है, तो जन्म तिथि, समय और स्थान से बनी कुंडली ही भरोसेमंद उत्तर देगी।

जन्म का समय पता न हो तो राशि कैसे जानें?

आधे से अधिक दिनों में चंद्र पूरे दिन एक ही राशि में रहता है, इसलिए केवल जन्म तिथि और स्थान से भी चंद्र राशि का अच्छा अनुमान लग सकता है। लेकिन जिस दिन चंद्र राशि बदलता है, उस दिन समय के बिना दो संभावित राशियाँ बनती हैं। लग्न के लिए तो सही समय अनिवार्य है, क्योंकि वह लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है।

राशि, लग्न और नक्षत्र में क्या अंतर है?

राशि यानी चंद्र राशि बताती है कि जन्म के समय चंद्र किस राशि में था, और यह मन की प्रकृति दर्शाती है। लग्न वह राशि है जो उस क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित हो रही थी; इसी से कुंडली के बारह भाव बनते हैं। नक्षत्र राशिचक्र के 27 छोटे हिस्से हैं, और चंद्र जिस नक्षत्र में हो, वही जन्म नक्षत्र कहलाता है।

राशिफल चंद्र राशि से पढ़ें या लग्न से?

परंपरा में दैनिक राशिफल चंद्र राशि से पढ़ा जाता है, क्योंकि गोचर का मन पर प्रभाव चंद्र से ही आँका जाता है; इस साइट का आज का राशिफल भी आपकी चंद्र राशि को पहला भाव मानता है। कुछ ज्योतिषी लग्न से भी मिलान करने की सलाह देते हैं। ध्यान रखें कि राशिफल सामान्य संकेत है, जो एक राशि के सभी लोगों पर एक जैसा लागू नहीं होता।

ग्रहों की स्थिति खगोलीय गणना से निकाली जाती है। ज्योतिषीय अर्थ प्रतीकात्मक व्याख्याएँ हैं, ये वैज्ञानिक व्यक्तित्व परीक्षण या भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।