2027 का आकाश · लाहिड़ी अयनांश · Swiss Ephemeris से गणना
ज्योतिष कैलेंडर 2027: महीने-दर-महीने गोचर
यह पन्ना 2027 की हर खास खगोलीय घटना को एक जगह रखता है। सारी स्थितियाँ स्विस एफ़िमेरिस से असली ग्रह-गणना करके निकाली गई हैं; राशियाँ निरयण लाहिड़ी पद्धति में और समय भारतीय मानक समय में दिए गए हैं। महीनेवार सूची में ग्रहों के वक्री और मार्गी होने के क्षण, ग्रहण, अमावस्या, पूर्णिमा और राशि परिवर्तन मिलेंगे, जबकि हर विषय का विस्तार उसके अपने पन्ने पर है। कोई घटना जीवन के किस क्षेत्र को छूती है, यह समझने के लिए इसे अपने वार्षिक राशिफल के साथ पढ़ें।
बुध वक्री 2027
बुध के तीनों वक्री काल, छाया काल की तारीखें और हर राशि के लिए भाव।
वक्री ग्रह 2027
बुध से प्लूटो तक हर ग्रह का वक्री काल और मार्गी होने के दिन।
ग्रहण 2027
हर सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का समय, प्रकार और राशि।
अमावस्या और पूर्णिमा 2027
साल की हर अमावस्या और पूर्णिमा, समय और राशि के साथ।
ग्रह गोचर 2027
राहु-केतु सहित ग्रहों के राशि परिवर्तन की तारीखें और समय।
सभी 12 राशियों का राशिफल 2027
2027 की बड़ी तस्वीर
साल की पृष्ठभूमि धीमे ग्रह तय करते हैं। शनि वर्ष की शुरुआत मीन में करता है, 3 जून को मेष में कदम रखता है और वक्री अवस्था में 20 अक्टूबर को फिर मीन में लौट आता है, इसलिए जून से अक्टूबर तक साढ़े साती और ढैय्या वाली राशियाँ अस्थायी रूप से बदल जाती हैं। गुरु का रास्ता भी घुमावदार है: वक्री चाल में जनवरी के अंत में सिंह से कर्क में, जून के अंत में फिर सिंह में और नवंबर के अंत में कन्या में। राहु पूरे साल मकर में और केतु कर्क में टिके रहते हैं, इसलिए पाँच में से चार ग्रहण इसी धुरी पर पड़ते हैं। यूरेनस वृषभ में, नेपच्यून मीन में और प्लूटो मकर में साल भर स्थिर पृष्ठभूमि बनाए रखते हैं।
इस कैलेंडर को कैसे पढ़ें
हर तारीख और घड़ी भारतीय मानक समय (IST) में है, जो UTC से साढ़े पाँच घंटे आगे चलता है। भारत से बाहर हों तो समय अपने क्षेत्र के हिसाब से बदलें, क्योंकि आधी रात के आसपास की घटना वहाँ दूसरी तारीख पर पड़ सकती है। राशियाँ निरयण हैं और लाहिड़ी अयनांश से गिनी गई हैं, जिस पर अधिकतर भारतीय पंचांग चलते हैं; सायन पश्चिमी कैलेंडरों से लगभग 24 अंश का यही अंतर उनकी अलग तारीखों की वजह है। अपना भाव निकालने के लिए चंद्र राशि को पहला भाव मानें; जन्म कुंडली में चंद्रमा जिस राशि में बैठा है, वही आपकी राशि है। मकर राशि वालों के लिए कुंभ की घटना दूसरे और मीन की तीसरे भाव में आती है। लग्न मालूम हो तो उससे भी गिनें।
साल के सबसे व्यस्त दौर
तीन दौर अलग से ध्यान खींचते हैं। फरवरी भरा हुआ महीना है: मंगल और गुरु पहले से वक्री हैं, 9 फरवरी की रात बुध भी उल्टी चाल पकड़ता है, और पखवाड़े भर के अंतर पर मकर में वलयाकार सूर्य ग्रहण तथा सिंह में उपच्छाया चंद्र ग्रहण आते हैं। दूसरा ग्रहण-काल जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक है: मकर के दो उपच्छाया चंद्र ग्रहणों के बीच कर्क का पूर्ण सूर्य ग्रहण, और 9 अगस्त से शनि वक्री। 7 से 18 अक्टूबर के बीच बुध, शनि, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो एक साथ वक्री रहते हैं। इसके उलट 13 अप्रैल से 8 मई तक बुध से प्लूटो तक कोई ग्रह वक्री नहीं, और नई शुरुआत के लिए कई लोग ऐसा खुला समय चुनते हैं।
2027: महीने दर महीने
जनवरी 2027
- शुक्र का वृश्चिक में गोचर
- अमावस्या (धनु)
- बुध का मकर में गोचर
- मंगल वक्री (सिंह)
- सूर्य का मकर में गोचर
- पूर्णिमा (कर्क)
- गुरु वक्री होकर कर्क में लौटता है
- बुध का कुंभ में गोचर
- शुक्र का धनु में गोचर
फ़रवरी 2027
- वलयाकार सूर्य ग्रहण (मकर)
- यूरेनस मार्गी (वृषभ)
- बुध वक्री (कुंभ)
- सूर्य का कुंभ में गोचर
- उपच्छाया चंद्र ग्रहण (सिंह)
- बुध वक्री होकर मकर में लौटता है
- शुक्र का मकर में गोचर
मार्च 2027
- बुध मार्गी (मकर)
- अमावस्या (कुंभ)
- मंगल वक्री होकर कर्क में लौटता है
- बुध का कुंभ में गोचर
- सूर्य का मीन में गोचर
- शुक्र का कुंभ में गोचर
- पूर्णिमा (कन्या)
अप्रैल 2027
- मंगल मार्गी (कर्क)
- बुध का मीन में गोचर
- अमावस्या (मीन)
- गुरु मार्गी (कर्क)
- सूर्य का मेष में गोचर
- शुक्र का मीन में गोचर
- पूर्णिमा (तुला)
- बुध का मेष में गोचर
- मंगल का सिंह में गोचर
मई 2027
- बुध का वृषभ में गोचर
- अमावस्या (मेष)
- प्लूटो वक्री (मकर)
- शुक्र का मेष में गोचर
- सूर्य का वृषभ में गोचर
- पूर्णिमा (वृश्चिक)
- बुध का मिथुन में गोचर
जून 2027
- शनि का मेष में गोचर
- शुक्र का वृषभ में गोचर
- अमावस्या (वृषभ)
- बुध वक्री (मिथुन)
- सूर्य का मिथुन में गोचर
- पूर्णिमा (धनु)
- गुरु का सिंह में गोचर
- शुक्र का मिथुन में गोचर
जुलाई 2027
- अमावस्या (मिथुन)
- बुध मार्गी (मिथुन)
- मंगल का कन्या में गोचर
- नेपच्यून वक्री (मीन)
- सूर्य का कर्क में गोचर
- उपच्छाया चंद्र ग्रहण (मकर)
- शुक्र का कर्क में गोचर
- बुध का कर्क में गोचर
अगस्त 2027
- पूर्ण सूर्य ग्रहण (कर्क)
- शनि वक्री (मेष)
- बुध का सिंह में गोचर
- शुक्र का सिंह में गोचर
- उपच्छाया चंद्र ग्रहण (मकर)
- सूर्य का सिंह में गोचर
- मंगल का तुला में गोचर
- बुध का कन्या में गोचर
- अमावस्या (सिंह)
सितंबर 2027
- शुक्र का कन्या में गोचर
- यूरेनस वक्री (वृषभ)
- पूर्णिमा (कुंभ)
- सूर्य का कन्या में गोचर
- बुध का तुला में गोचर
- अमावस्या (कन्या)
अक्टूबर 2027
- शुक्र का तुला में गोचर
- बुध वक्री (तुला)
- मंगल का वृश्चिक में गोचर
- पूर्णिमा (मीन)
- सूर्य का तुला में गोचर
- प्लूटो मार्गी (मकर)
- शनि वक्री होकर मीन में लौटता है
- बुध वक्री होकर कन्या में लौटता है
- शुक्र का वृश्चिक में गोचर
- बुध मार्गी (कन्या)
- अमावस्या (तुला)
नवंबर 2027
- बुध का तुला में गोचर
- पूर्णिमा (मेष)
- सूर्य का वृश्चिक में गोचर
- मंगल का धनु में गोचर
- शुक्र का धनु में गोचर
- बुध का वृश्चिक में गोचर
- गुरु का कन्या में गोचर
- अमावस्या (वृश्चिक)
दिसंबर 2027
- पूर्णिमा (वृषभ)
- बुध का धनु में गोचर
- शुक्र का मकर में गोचर
- नेपच्यून मार्गी (मीन)
- सूर्य का धनु में गोचर
- शनि मार्गी (मीन)
- मंगल का मकर में गोचर
- अमावस्या (धनु)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2027 में कितने ग्रहण हैं और वे कब पड़ते हैं?
2027 में पाँच ग्रहण हैं: 6 फरवरी को मकर में वलयाकार सूर्य ग्रहण, 21 फरवरी को सिंह में और 18 जुलाई व 17 अगस्त को मकर में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, तथा 2 अगस्त को कर्क में पूर्ण सूर्य ग्रहण। उपच्छाया ग्रहणों में परंपरा प्रायः सूतक नहीं मानती। सूर्य ग्रहणों का सूतक और उनका दिखना जगह पर निर्भर करता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से मिलान करें।
ज्योतिष कैलेंडर 2027 किस समय और किस राशि पद्धति पर आधारित है?
समय भारतीय मानक समय में है और ग्रहों की राशियाँ निरयण लाहिड़ी अयनांश से निकाली गई हैं, यानी वही आधार जिस पर ज़्यादातर भारतीय पंचांग बनते हैं। इसी कारण यहाँ की तारीखें पश्चिमी सायन राशिफलों से मेल नहीं खातीं। विदेश में बसे पाठक घड़ी का अंतर जोड़-घटाकर देखें, क्योंकि देर रात की कोई घटना उनके यहाँ अगले या पिछले दिन की हो सकती है।
शनि 2027 में राशि कब बदलता है और साढ़े साती पर क्या असर है?
शनि 3 जून 2027 को मीन से मेष में जाता है और वक्री रहते हुए 20 अक्टूबर को मीन में लौट आता है। इस बीच साढ़े साती मीन, मेष और वृषभ पर तथा ढैय्या कन्या और मकर पर रहती है। साल के बाकी हिस्से में साढ़े साती कुंभ, मीन और मेष पर और ढैय्या सिंह तथा धनु पर चलती है। अपनी स्थिति अपने राशिफल में देखें।
गुरु 2027 में किन राशियों से होकर गुज़रता है?
गुरु साल की शुरुआत सिंह में वक्री अवस्था में करता है और 25 जनवरी को पीछे खिसककर कर्क में आता है, जो उसकी उच्च राशि मानी जाती है। 13 अप्रैल को वह कर्क में ही मार्गी होता है, 26 जून को फिर सिंह में लौटता है और 26 नवंबर को कन्या में प्रवेश करता है। इस तरह साल भर गुरु का असर तीन राशियों के बीच बँटा रहता है।
तारीखें और समय भारतीय मानक समय (IST) में दिए गए हैं। ग्रह स्थितियाँ Swiss Ephemeris से निरयण पद्धति (लाहिड़ी अयनांश) में निकाली गई हैं।