2027 का आकाश · लाहिड़ी अयनांश · Swiss Ephemeris से गणना

वक्री ग्रह 2027: हर ग्रह की उल्टी चाल

वक्री ग्रह साल की रफ़्तार तय करते हैं, और 2027 में ऐसे कई दौर हैं: बुध के तीन वक्री काल, जनवरी से अप्रैल तक मंगल की उल्टी चाल, दिसंबर 2026 से चला आ रहा गुरु का वक्री काल, और शनि, यूरेनस, नेपच्यून तथा प्लूटो के लंबे पुनरावलोकन। तालिका में हर ग्रह के वक्री-मार्गी होने के क्षण छाया काल सहित भारतीय मानक समय में हैं, पिछले साल शुरू हुए दौर भी। धीमे ग्रहों को मौसम जैसी पृष्ठभूमि और बुध-मंगल की तारीखों को रोज़ के मोड़ समझें।

ग्रहछाया काल आरंभवक्री आरंभमार्गीछाया काल समाप्त
बुध26 जनवरी9 फ़रवरी को 23:06 बजे
11°45′ कुंभ
3 मार्च को 18:02 बजे
26°41′ मकर
23 मार्च
बुध26 मई10 जून को 23:45 बजे
12°07′ मिथुन
5 जुलाई को 01:09 बजे
3°14′ मिथुन
19 जुलाई
बुध17 सितंबर7 अक्टूबर को 20:07 बजे
10°41′ तुला
28 अक्टूबर को 19:40 बजे
25°04′ कन्या
13 नवंबर
मंगल5 नव॰ 202610 जनवरी को 18:29 बजे
16°11′ सिंह
1 अप्रैल को 19:38 बजे
26°41′ कर्क
8 जून
गुरु17 सित॰ 202613 दिस॰ 2026
2°47′ सिंह
13 अप्रैल को 07:41 बजे
22°46′ कर्क
11 जुलाई
शनि4 मई9 अगस्त को 23:36 बजे
3°38′ मेष
24 दिसंबर को 08:17 बजे
26°46′ मीन
27 मार्च 2028
यूरेनस25 मई 202610 सित॰ 2026
11°28′ वृषभ
8 फ़रवरी को 17:59 बजे
7°27′ वृषभ
26 मई
यूरेनस30 मई15 सितंबर को 14:39 बजे
15°43′ वृषभ
13 फ़र॰ 2028
11°41′ वृषभ
30 मई 2028
नेपच्यून18 मार्च10 जुलाई को 04:11 बजे
12°25′ मीन
15 दिसंबर को 14:36 बजे
9°37′ मीन
4 अप्रैल 2028
प्लूटो13 जनवरी8 मई को 18:24 बजे
12°56′ मकर
18 अक्टूबर को 09:22 बजे
10°30′ मकर
9 फ़र॰ 2028

2027 में शुक्र वक्री नहीं होता।

व्यक्तिगत और धीमे ग्रहों की वक्री चाल

हर वक्री काल का वज़न एक जैसा नहीं होता। बुध, शुक्र और मंगल सोचने, जुड़ने और कर्म करने के ढंग से जुड़े हैं; उनकी उल्टी चाल छोटी होती है और जल्दी महसूस होती है, जैसे योजनाओं का खिसकना या पुराने संपर्कों का लौटना। गुरु और शनि हर साल लगभग चार से साढ़े चार महीने वक्री रहते हैं, इसलिए विकास और ज़िम्मेदारी की समीक्षा धीरे चलती है। यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो नवग्रहों में शामिल नहीं; उनके लंबे वक्री काल पीढ़ीगत पृष्ठभूमि जैसे हैं। राहु-केतु परंपरा में हमेशा वक्री माने जाते हैं, इसलिए उनकी अलग वक्री-मार्गी तारीखें नहीं होतीं। शास्त्रीय ज्योतिष वक्री ग्रह को चेष्टा बल से युक्त मानता है, कमज़ोर नहीं। किसी ग्रह का आपके लिए भाव जन्म कुंडली वाली चंद्र राशि से गिनें।

2027 की प्रमुख वक्री घटनाएँ

साल का पहला मोड़ मंगल देता है: 10 जनवरी को सिंह में उल्टी चाल, मार्च में कर्क में वापसी और 1 अप्रैल को वहीं मार्गी, इसलिए पहली तिमाही धैर्य माँगती है। दिसंबर 2026 से वक्री गुरु 13 अप्रैल को कर्क में मार्गी होता है, और 8 मई तक बुध से प्लूटो तक सब मार्गी रहते हैं। फिर प्लूटो अक्टूबर के मध्य तक मकर में और नेपच्यून जुलाई से दिसंबर तक मीन में पीछे चलते हैं; फरवरी से मार्गी यूरेनस सितंबर के मध्य में वृषभ में फिर वक्री होता है। शनि 9 अगस्त को मेष में वक्री होकर 20 अक्टूबर को मीन में लौटता है और 24 दिसंबर को मार्गी होता है। शुक्र इस साल वक्री नहीं होता, इसलिए प्रेम और धन में कोई तय विराम नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या 2027 में शुक्र ग्रह कभी वक्री होगा?

नहीं। 2027 में शुक्र पूरे साल मार्गी रहता है: उसका पिछला वक्री काल नवंबर 2026 में खत्म हुआ और अगला 2028 में शुरू होगा। इस विराम के बिना शुक्र साल भर में बारहों राशियों से होकर गुज़रता है, इसलिए प्रेम, सुख-सुविधा और धन से जुड़े विषय पुराने फैसलों पर लौटने के बजाय आगे बढ़ने की ओर झुकते हैं।

मंगल 2027 में कब मार्गी होगा और उसके बाद क्या बदलता है?

मंगल 1 अप्रैल 2027 को 19:38 बजे (IST) कर्क के 26 अंश 41 कला पर मार्गी होता है। उसकी वक्री चाल 10 जनवरी को सिंह में शुरू हुई थी और 10 मार्च को वह पीछे खिसककर कर्क में आया था। 26 अप्रैल को मंगल फिर सिंह में जाता है और उसका छाया काल 8 जून तक चलता है, इसलिए रुके हुए काम धीरे-धीरे गति पकड़ते हैं।

2027 में शनि कितने समय तक वक्री रहेगा?

शनि 9 अगस्त से 24 दिसंबर 2027 तक, करीब साढ़े चार महीने वक्री रहता है। यह दौर मेष में शुरू होता है, 20 अक्टूबर को शनि पीछे खिसककर मीन में लौटता है और वहीं मार्गी होता है। छाया काल मई की शुरुआत से मार्च 2028 के अंत तक फैला है। इन महीनों में परखें कि जो ज़िम्मेदारियाँ आपने उठाई हैं, वे अब भी सही बैठती हैं या बदलनी चाहिए।

2027 में एक साथ सबसे ज़्यादा ग्रह कब वक्री रहते हैं?

7 से 18 अक्टूबर 2027 के बीच पाँच ग्रह एक साथ वक्री रहते हैं: बुध, शनि, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो। 18 अक्टूबर को प्लूटो और 28 अक्टूबर को बुध मार्गी हो जाते हैं। इसका उलटा समय 13 अप्रैल से 8 मई तक आता है, जब सदा वक्री माने जाने वाले राहु-केतु को छोड़कर हर ग्रह सीधी चाल में रहता है।

ज्योतिष कैलेंडर 2027

तारीखें और समय भारतीय मानक समय (IST) में दिए गए हैं। ग्रह स्थितियाँ Swiss Ephemeris से निरयण पद्धति (लाहिड़ी अयनांश) में निकाली गई हैं।