2027 का आकाश · लाहिड़ी अयनांश · Swiss Ephemeris से गणना

ग्रह गोचर 2027: राशि परिवर्तन

गोचर का अर्थ है किसी ग्रह का एक राशि छोड़कर दूसरी राशि में प्रवेश करना। इस पृष्ठ पर 2027 में बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, यूरेनस, नेपच्यून, प्लूटो और राहु–केतु के हर राशि परिवर्तन का समय IST में दिया गया है, और जहाँ कोई ग्रह वक्री रहते हुए पिछली राशि में लौटता है, वहाँ अलग संकेत है। सूर्य की मासिक संक्रांतियाँ यहाँ शामिल नहीं हैं। सभी राशियाँ लाहिड़ी अयनांश वाली निरयण पद्धति से गिनी गई हैं।

बुध

  • बुध का मकर में गोचर
  • बुध का कुंभ में गोचर
  • बुध वक्री होकर मकर में लौटता है
  • बुध का कुंभ में गोचर
  • बुध का मीन में गोचर
  • बुध का मेष में गोचर
  • बुध का वृषभ में गोचर
  • बुध का मिथुन में गोचर
  • बुध का कर्क में गोचर
  • बुध का सिंह में गोचर
  • बुध का कन्या में गोचर
  • बुध का तुला में गोचर
  • बुध वक्री होकर कन्या में लौटता है
  • बुध का तुला में गोचर
  • बुध का वृश्चिक में गोचर
  • बुध का धनु में गोचर

शुक्र

  • शुक्र का वृश्चिक में गोचर
  • शुक्र का धनु में गोचर
  • शुक्र का मकर में गोचर
  • शुक्र का कुंभ में गोचर
  • शुक्र का मीन में गोचर
  • शुक्र का मेष में गोचर
  • शुक्र का वृषभ में गोचर
  • शुक्र का मिथुन में गोचर
  • शुक्र का कर्क में गोचर
  • शुक्र का सिंह में गोचर
  • शुक्र का कन्या में गोचर
  • शुक्र का तुला में गोचर
  • शुक्र का वृश्चिक में गोचर
  • शुक्र का धनु में गोचर
  • शुक्र का मकर में गोचर

मंगल

  • मंगल वक्री होकर कर्क में लौटता है
  • मंगल का सिंह में गोचर
  • मंगल का कन्या में गोचर
  • मंगल का तुला में गोचर
  • मंगल का वृश्चिक में गोचर
  • मंगल का धनु में गोचर
  • मंगल का मकर में गोचर

गुरु

  • गुरु वक्री होकर कर्क में लौटता है
  • गुरु का सिंह में गोचर
  • गुरु का कन्या में गोचर

शनि

  • शनि का मेष में गोचर
  • शनि वक्री होकर मीन में लौटता है

यूरेनस

वृषभ · पूरे वर्ष

नेपच्यून

मीन · पूरे वर्ष

प्लूटो

मकर · पूरे वर्ष

राहु

मकर · पूरे वर्ष

राशि बदलने का अर्थ

हर ग्रह का मूल काम हर राशि में वही रहता है: बुध सोचता और बोलता है, शुक्र जोड़ता है, मंगल कर्म करता है। राशि बदलने पर उसका ढंग बदलता है। कन्या का मंगल बारीकी और नियमित अभ्यास से काम करता है, वही मंगल धनु में विस्तार, गति और किसी उद्देश्य की तलाश करता है। वैदिक ज्योतिष ग्रह की गरिमा भी देखता है: स्वराशि, उच्च या नीच राशि उसकी अभिव्यक्ति का स्वर बदलती है। व्यक्तिगत स्तर पर गोचर का मतलब है कि ग्रह आपकी जन्म कुंडली की चंद्र राशि से गिने गए नए भाव में पहुँच गया, इसलिए जीवन का सक्रिय क्षेत्र भी बदलता है। तेज़ ग्रह कुछ हफ्तों में राशि बदलकर मौसम का मिज़ाज बनाते हैं, जबकि गुरु और शनि का गोचर पूरे वर्ष की दिशा तय करता है।

2027 के प्रमुख गोचर

सबसे चर्चित है शनि गोचर: जून की शुरुआत में शनि मीन से मेष में जाता है और अक्टूबर के उत्तरार्ध में वक्री होकर मीन में लौट आता है। इस बीच कई राशियों की साढ़े साती और ढैय्या अस्थायी रूप से बदलती है; ब्योरा हर राशि के वार्षिक राशिफल में है। गुरु तीन राशियाँ छूता है: वक्री रहते हुए 25 जनवरी को अपनी उच्च राशि कर्क में, जून के आखिरी सप्ताह में वापस सिंह में और नवंबर के उत्तरार्ध से कन्या में। वक्री मंगल मार्च में कर्क में जाता है और दिसंबर के अंत में मकर तक पहुँचता है। बिना वक्री हुए शुक्र पंद्रह बार राशि बदलता है, जबकि राहु मकर, केतु कर्क, यूरेनस वृषभ, नेपच्यून मीन और प्लूटो मकर में पूरे वर्ष टिके रहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में शनि गोचर कब है और शनि मीन में कब लौटेगा?

शनि 3 जून 2027 को सुबह 04:43 IST पर मीन से मेष राशि में जाता है। 9 अगस्त को मेष में वक्री होने के बाद वह 20 अक्टूबर को 08:13 IST पर वक्री अवस्था में ही मीन में लौट आता है और 24 दिसंबर को मीन में मार्गी होता है। जून से अक्टूबर तक उठे विषयों को वर्ष के अंत तक धैर्य से पूरा करने का समय मिलता है।

गुरु गोचर 2027: गुरु कर्क, सिंह और कन्या में कब रहेगा?

1 जनवरी से 25 जनवरी तक गुरु सिंह में है, फिर 25 जनवरी से 26 जून तक कर्क में, जहाँ 13 अप्रैल को उसकी वक्री चाल समाप्त होती है। 26 जून से 26 नवंबर तक वह दोबारा सिंह में चलता है और 26 नवंबर की शाम 18:07 IST से वर्ष के अंत तक कन्या में रहता है। कर्क को परंपरा में गुरु की उच्च राशि कहा जाता है।

2027 में राहु और केतु किस राशि में रहेंगे?

राहु पूरे 2027 में मकर राशि में और केतु उसके ठीक सामने कर्क राशि में रहता है; इस वर्ष इनका कोई राशि परिवर्तन नहीं होता। वर्ष के पाँच में से चार ग्रहण इन्हीं दो राशियों में पड़ते हैं, इसलिए आपकी राशि से मकर और कर्क जिन भावों में आते हैं, उन भावों के विषय पूरे वर्ष बार-बार सामने आते हैं।

कोई ग्रह वक्री होकर पिछली राशि में क्यों लौटता है?

पृथ्वी से देखने पर वक्री ग्रह आकाश में पीछे खिसकता हुआ दिखता है, और अगर उसने कुछ समय पहले ही राशि बदली हो तो वह सीमा पार करके पिछली राशि में लौट आता है। 2027 में बुध फरवरी और अक्टूबर में, गुरु जनवरी में, मंगल मार्च में और शनि अक्टूबर में ऐसा करते हैं। ऐसे दौर पुनर्विचार और अधूरे काम पूरे करने के लिए उपयुक्त हैं।

ज्योतिष कैलेंडर 2027

तारीखें और समय भारतीय मानक समय (IST) में दिए गए हैं। ग्रह स्थितियाँ Swiss Ephemeris से निरयण पद्धति (लाहिड़ी अयनांश) में निकाली गई हैं।