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नाम से राशि कैसे जानें: पहले अक्षर से राशि, नक्षत्र और पद

अपना पहला नाम देवनागरी या रोमन अक्षरों में टाइप करें। नाम जिस ध्वनि से शुरू होता है, जैसे पूजा में “पू” या प्रिया में “पी”, वह अवकहडा चक्र के 108 पदों में से किसी एक का अक्षर है। वही पद आपकी नाम राशि, नक्षत्र, राशि स्वामी और तत्व बताता है। जहाँ अंग्रेज़ी स्पेलिंग से दो उच्चारण बनते हैं, वहाँ दोनों राशियाँ दिखाई जाती हैं। आगे बारहों राशियों का अक्षर चार्ट और A–Z सूची भी है।

नाम से राशि कैलकुलेटर

नाम राशि चार्ट: 12 राशियों के नाम अक्षर

हर राशि में 9 पद हैं और हर पद का एक तय नाम अक्षर। तालिका में देवनागरी अक्षरों के साथ उनकी रोमन स्पेलिंग भी दी गई है। मकर की पंक्ति में अभिजित नक्षत्र के चार अक्षर, जू, जे, जो और खा, अलग से जोड़े गए हैं।

राशिनाम के पहले अक्षर
मेषचू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
वृषभई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
मिथुनका, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा
कर्कही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
सिंहमा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
कन्याटो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
तुलारा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
वृश्चिकतो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
धनुये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
मकरभो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गीअभिजित: जू, जे, जो, खा
कुंभगू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
मीनदी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

अंग्रेज़ी अक्षर A–Z से नाम की राशि

नाम अंग्रेज़ी में लिखा हो तो एक ही रोमन अक्षर कई राशियों में जा सकता है, क्योंकि राशि मात्रा के साथ बदलती है। P वाले नाम ज़्यादातर कन्या में आते हैं, जबकि T या D वाले नाम दो या उससे अधिक राशियों में बँट जाते हैं।

अक्षरसंभावित राशियाँ और अक्षर
Aमेष: A (अ)
Bवृषभ: Va (वा), Vi (वी), Vu (वू), Ve (वे), Vo (वो)धनु: Bha (भा), Bhi (भी), Bhu (भू), Bhe (भे)मकर: Bho (भो)
Cमेष: Chu (चू), Che (चे), Cho (चो)मिथुन: Ka (का), Ku (कू), Chha (छ), Ko (को)कुंभ: Si (सी), Se (से)मीन: Cha (चा), Chi (ची)
Dकर्क: Da (डा), Di (डी), Du (डू), De (डे), Do (डो)धनु: Dha (धा), Dha (ढा)कुंभ: Da (दा)मीन: Di (दी), Du (दू), De (दे), Do (दो)
Eवृषभ: E (ए)
Fधनु: Pha (फा)
Gमिथुन: Gha (घ)मकर: Ga (गा), Gi (गी)कुंभ: Gu (गू), Ge (गे), Go (गो)
Hमिथुन: Ha (हा)कर्क: Hi (ही), Hu (हू), He (हे), Ho (हो)
Iवृषभ: I (ई)
Jमकर: Ja (जा), Ju (जू), Je (जे), Jo (जो), Ji (जी)मीन: Jha (झ)
Kमिथुन: Ka (का), Ki (की), Ku (कू), Ke (के), Ko (को)मकर: Kha (खा), Khi (खी), Khu (खू), Khe (खे), Kho (खो)
Lमेष: La (ला), Li (ली), Lu (लू), Le (ले), Lo (लो)
Mसिंह: Ma (मा), Mi (मी), Mu (मू), Me (मे), Mo (मो)
Nवृश्चिक: Na (ना), Ni (नी), Nu (नू), Ne (ने), No (नो)
Oवृषभ: O (ओ)
Pकन्या: Pa (पा), Pi (पी), Pu (पू), Pe (पे), Po (पो)धनु: Pha (फा)
Qमिथुन: Ka (का), Ki (की), Ku (कू), Ke (के), Ko (को)
Rतुला: Ra (रा), Ri (री), Ru (रू), Re (रे), Ro (रो)
Sकन्या: Sha (ष)कुंभ: Sa (सा), Si (सी), Su (सू), Se (से), So (सो)
Tसिंह: Ta (टा), Ti (टी), Tu (टू), Te (टे)कन्या: To (टो)तुला: Ta (ता), Ti (ती), Tu (तू), Te (ते)वृश्चिक: To (तो)मीन: Tha (थ)
Uवृषभ: U (उ)
Vवृषभ: Va (वा), Vi (वी), Vu (वू), Ve (वे), Vo (वो)
Wवृषभ: Va (वा), Vi (वी), Vu (वू), Ve (वे), Vo (वो)
Xमिथुन: Ka (का), Ki (की), Ku (कू), Ke (के), Ko (को)
Yवृश्चिक: Ya (या), Yi (यी), Yu (यू)धनु: Ye (ये), Yo (यो)
Zमकर: Ja (जा), Ju (जू), Je (जे), Jo (जो), Ji (जी)

नाम से राशि कैसे निकलती है: अक्षर, पद और राशि

राशिचक्र 27 नक्षत्रों में बँटा है और हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, जिन्हें पद कहते हैं। इस तरह कुल 108 पद बनते हैं। परंपरा ने हर पद को एक ध्वनि दी है, जिसे नाम अक्षर कहा जाता है, और इन अक्षरों की तालिका अवकहडा चक्र कहलाती है। पंचांग और नामकरण दोनों में यही तालिका काम आती है। एक राशि में ठीक 9 पद, यानी सवा दो नक्षत्र, आते हैं, इसलिए हर राशि के हिस्से में 9 नाम अक्षर हैं।

नाम राशि निकालते समय नाम का पहला अक्षर उसी रूप में देखा जाता है जैसे वह बोला जाता है, यानी मात्रा समेत। केवल व्यंजन देख लेना काफ़ी नहीं। पूजा नाम “पू” से शुरू होता है, जो हस्त नक्षत्र का पहला पद है, इसलिए राशि कन्या है। राहुल का “रा” चित्रा के तीसरे पद में आता है और तुला राशि देता है। मोहन का “मो” पूर्वा फाल्गुनी का पहला पद है, जो सिंह राशि का हिस्सा है।

मात्रा बदलते ही राशि भी बदल सकती है। “टा”, “टी”, “टू” और “टे” सिंह के अक्षर हैं, पर “टो” कन्या में चला जाता है। इसी तरह “ता” से “ते” तक के अक्षर तुला के हैं, जबकि “तो” वृश्चिक का। स्वर से आरंभ होने वाले नामों का नियम सीधा है: अ या आ वाला नाम, जैसे आरव, कृत्तिका के पहले पद से मेष में आता है, और इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ या औ वाला नाम, जैसे ईशान, वृषभ में।

नाम से नक्षत्र: 27 नक्षत्रों के पद अक्षर

हर नक्षत्र के चार पद हैं और हर पद का अपना अक्षर है। अपने नाम का पहला अक्षर इस तालिका में खोजें, तो नक्षत्र, पद और राशि एक ही पंक्ति में मिल जाएँगे। सबसे नीचे अभिजित की पंक्ति है, जिसके अक्षर मकर राशि में गिने जाते हैं।

नक्षत्रपद 1–4 के अक्षरराशि
अश्विनी1चू2चे3चो4लामेष
भरणी1ली2लू3ले4लोमेष
कृत्तिका1अ2ई3उ4एमेष / वृषभ
रोहिणी1ओ2वा3वी4वूवृषभ
मृगशिरा1वे2वो3का4कीवृषभ / मिथुन
आर्द्रा1कू2घ3ङ4छमिथुन
पुनर्वसु1के2को3हा4हीमिथुन / कर्क
पुष्य1हू2हे3हो4डाकर्क
आश्लेषा1डी2डू3डे4डोकर्क
मघा1मा2मी3मू4मेसिंह
पूर्वा फाल्गुनी1मो2टा3टी4टूसिंह
उत्तरा फाल्गुनी1टे2टो3पा4पीसिंह / कन्या
हस्त1पू2ष3ण4ठकन्या
चित्रा1पे2पो3रा4रीकन्या / तुला
स्वाति1रू2रे3रो4तातुला
विशाखा1ती2तू3ते4तोतुला / वृश्चिक
अनुराधा1ना2नी3नू4नेवृश्चिक
ज्येष्ठा1नो2या3यी4यूवृश्चिक
मूल1ये2यो3भा4भीधनु
पूर्वाषाढ़ा1भू2धा3फा4ढाधनु
उत्तराषाढ़ा1भे2भो3जा4जीधनु / मकर
श्रवण1खी2खू3खे4खोमकर
धनिष्ठा1गा2गी3गू4गेमकर / कुंभ
शतभिषा1गो2सा3सी4सूकुंभ
पूर्वा भाद्रपद1से2सो3दा4दीकुंभ / मीन
उत्तरा भाद्रपद1दू2थ3झ4ञमीन
रेवती1दे2दो3चा4चीमीन
अभिजितजूजेजोखामकर

नाम राशि बनाम जन्म राशि: कब किसे मानें

जन्म राशि का अर्थ है वह राशि, जिसमें आपके पैदा होने के पल चंद्रमा निरयन राशिचक्र में स्थित था। इसे निकालने के लिए जन्म तिथि, जन्म का सही समय और जन्म स्थान चाहिए। कुंडली, विंशोत्तरी दशा और अष्टकूट गुण मिलान, तीनों इसी जन्म राशि और जन्म नक्षत्र पर टिके हैं। नाम राशि कोई खगोलीय स्थिति नहीं है, बल्कि नाम रखने की एक परंपरा है, जो नाम की ध्वनि को राशिचक्र के एक पद से जोड़ती है।

नाम राशि का उपयोग मुख्य रूप से दो स्थितियों में होता है। पहली, जब जन्म का समय या तारीख पता न हो: तब लोग राशिफल पढ़ने या नाम के आधार पर मोटा मिलान करने के लिए इसी का सहारा लेते हैं। दूसरी, नामकरण में: बच्चे का नाम उस अक्षर से रखा जाता है जो जन्म की घड़ी में चंद्रमा वाले नक्षत्र-चरण के लिए तय है। ऐसे नाम में दोनों राशियाँ अपने आप एक हो जाती हैं।

अगर दोनों राशियाँ अलग आती हैं, तो उलझन स्वाभाविक है। नियम सरल है: जन्म समय मालूम हो तो जन्म राशि को प्राथमिकता दें और कुंडली या विवाह मिलान उसी के आधार पर करें। नाम राशि तब काम की है जब जन्म विवरण उपलब्ध न हो, या जब आप जानना चाहते हों कि परंपरा के अनुसार आपके नाम का संबंध किस पद से बनता है। बहुत से लोगों का नाम नक्षत्र अक्षर से नहीं रखा गया होता, इसलिए दोनों में अंतर होना आम बात है।

स्पेलिंग की उलझनें: त/ट, द/ड, श, ब और संयुक्त अक्षर

हिंदी में दंत्य त और द तथा मूर्धन्य ट और ड अलग ध्वनियाँ हैं और अलग राशियों में आती हैं, पर अंग्रेज़ी में इन सबके लिए T और D ही लिखे जाते हैं। “Tanvi” को तन्वी पढ़ें तो “ता” से तुला बनती है, “टा” पढ़ें तो सिंह। “Deepak” का “दी” मीन देता है, जबकि “डी” कर्क। दक्षिण भारतीय स्पेलिंग, जैसे “Tharun”, में th अक्सर सादे त के लिए लिखा जाता है, इसलिए कैलकुलेटर th को पहले त और फिर विकल्प में थ पढ़ता है। देवनागरी में लिखे नाम में यह दुविधा होती ही नहीं।

अवकहडा चक्र में श और ब के लिए अलग अक्षर नहीं हैं। यह कैलकुलेटर श को स के बराबर रखता है, इसलिए श्रेया “से” के ज़रिये पूर्वा भाद्रपद के पहले पद में पहुँचकर कुंभ राशि पाती है। ष को आधार मानने वाली परंपरा के लिए कन्या भी विकल्प में दिखाई जाती है, क्योंकि इस मुद्दे पर पंचांगों की राय बँटी हुई है। ब को पुरानी रीति में व के समान गिना जाता है, सो बबलू “वा” से वृषभ में आता है।

संयुक्त अक्षर अपने पहले व्यंजन से गिने जाते हैं: क्ष को क, त्र को त, ज्ञ को ज और श्र को श माना जाता है। इसी कारण क्षितिज “की” से मिथुन, त्रिशा “ती” से तुला और ज्ञान “जा” से मकर में आते हैं। ऐ और औ की मात्रा को चक्र में ए और ओ की मात्रा के बराबर रखा जाता है: कैलाश “के” से मिथुन और गौरव “गो” से कुंभ। जिन अक्षरों का चक्र में सिर्फ़ एक रूप मिलता है, जैसे थ, झ, ढ या ध, वे हर मात्रा पर वही पद देते हैं; ध्रुव इसी तरह “धा” के रास्ते धनु में पहुँचता है, हालाँकि यह मिलान अनुमानित है।

नक्षत्र अक्षर से बच्चे का नाम और नाम से गुण मिलान

नामकरण की परंपरा में पहले बच्चे की जन्म कुंडली से देखा जाता है कि जन्म के समय चंद्रमा किस नक्षत्र और किस पद में था। उस पद का अक्षर ही नाम का पहला अक्षर बनता है। मान लीजिए चंद्रमा हस्त के पहले पद में है, तो अक्षर “पू” होगा और पूजा या पूर्वी जैसे नाम सुझाए जाएँगे; उत्तरा फाल्गुनी के चौथे पद पर “पी” आता है, जिससे प्रिया जैसे नाम बनते हैं। चंद्रमा एक नक्षत्र लगभग एक दिन में पार करता है और पद कुछ ही घंटों में बदल जाता है, इसलिए केवल तारीख नहीं, जन्म का समय और स्थान भी चाहिए।

यही तालिका उल्टी दिशा में भी काम आती है: नाम पहले से तय है और आप जानना चाहते हैं कि वह किस नक्षत्र पद का अक्षर है। ऊपर की नक्षत्र तालिका ठीक यही दिखाती है। अगर बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से रखा गया था, तो कैलकुलेटर का परिणाम उसकी जन्म राशि से मेल खाएगा। अगर नाम परिवार की पसंद या किसी बुज़ुर्ग की याद में रखा गया था, तो दोनों राशियाँ अलग हो सकती हैं, और यह बिलकुल सामान्य है।

जब वर या वधू में से किसी का जन्म समय पता न हो, तो कुछ परिवार नामों के आधार पर गुण मिलवाते हैं। इसमें जन्म नक्षत्र की जगह नाम अक्षर वाला नक्षत्र पद और जन्म राशि की जगह नाम राशि रखी जाती है। ऐसा मिलान केवल मोटा अंदाज़ा देता है, क्योंकि अष्टकूट के आठों कूट चंद्रमा की असल स्थिति के लिए बने हैं। दोनों की जन्म जानकारी उपलब्ध हो, तो 36 गुणों वाला मिलान जन्म कुंडली के चंद्र नक्षत्र से ही करें।

परिणाम कैसे पढ़ें और इसकी सीमाएँ

परिणाम कार्ड में सबसे ऊपर नाम राशि है, फिर नाम अक्षर, नक्षत्र व पद, स्वामी ग्रह और तत्व। अगर नाम रोमन में लिखा हो और उसे एक से ज़्यादा तरह से पढ़ा जा सकता हो, तो मुख्य परिणाम के नीचे विकल्प भी दिखते हैं। जो उच्चारण आपके घर में बोला जाता है, उसी वाली राशि लें। अगर सभी विकल्प एक ही राशि में आते हैं, तो कार्ड यह साफ़ लिख देता है, और तब स्पेलिंग को लेकर चिंता करने की ज़रूरत नहीं रहती।

नाम राशि एक प्रतीकात्मक परंपरा है: यह बताती है कि आपके नाम की ध्वनि किस पद से जुड़ती है, न कि जन्म के समय आकाश में चंद्रमा कहाँ था। इसलिए इससे भविष्यवाणी, दशा या ग्रहों की स्थिति नहीं निकाली जा सकती। अपनी असली चंद्र राशि, लग्न और जन्म नक्षत्र जानने के लिए जन्म विवरण भरकर अपनी वैदिक कुंडली तैयार करें; वह लाहिड़ी अयनांश से ग्रहों की वास्तविक स्थिति गिनती है।

यह विधि भारतीय नामों के लिए बनी है। किसी भी भाषा के नाम का पहला उच्चारण इस चक्र में ढूँढा जा सकता है, जैसे Thomas “तो” से वृश्चिक या रूसी Ольга “ओ” से वृषभ, पर ऐसे परिणाम को जिज्ञासा की तरह देखें, छिपे हुए सच की तरह नहीं। एक ही नाम हर बार एक ही राशि देता है, क्योंकि गणना केवल लिखित अक्षर तालिका पर चलती है और इसमें किसी की निजी राय शामिल नहीं होती।

नाम से राशि: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

12 राशियों में कौन-कौन से नाम आते हैं?

हर राशि अपने 9 नाम अक्षरों से पहचानी जाती है; मोटे तौर पर सूची यह है। मेष: अ, ल, चू, चे, चो; वृषभ: इ, उ, ए, ओ, व (और ब); मिथुन: क, घ, ङ, छ, हा; कर्क: ड, ही, हू, हे, हो; सिंह: म, टा, टी, टू, टे; कन्या: प, ष, ण, ठ, टो; तुला: र, ता, ती, तू, ते; वृश्चिक: न, तो, या, यी, यू; धनु: ध, फ, ढ, भा, भी, भू, भे, ये, यो; मकर: ज, ख, भो, गा, गी; कुंभ: स (और श), गू, गे, गो, दा; मीन: थ, झ, ञ, दी, दू, दे, दो, चा, ची। मात्रा सहित पूरी सूची ऊपर के चार्ट में है।

नाम अक्षर से राशि कैसे जानें?

नाम को उसी तरह बोलिए जैसे घर में पुकारा जाता है और पहली ध्वनि मात्रा सहित अलग कीजिए: पूजा से “पू”, राहुल से “रा”, नेहा से “ने”। अब यह अक्षर ऊपर के चार्ट में खोजिए। “पू” कन्या की पंक्ति में मिलेगा, “रा” तुला की और “ने” वृश्चिक की। कैलकुलेटर में नाम लिखने पर यही काम अपने आप हो जाता है, और साथ में नक्षत्र, पद और राशि का स्वामी ग्रह भी दिख जाता है।

नाम राशि और जन्म राशि में क्या अंतर है?

जन्म राशि आकाश की एक वास्तविक स्थिति है: वह राशि, जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था। इसका पता तारीख, समय और जन्मस्थान से कुंडली बनाकर चलता है। नाम राशि का आकाश से कोई संबंध नहीं; वह केवल नाम की पहली ध्वनि से तय होती है और उसके लिए कोई जन्म विवरण नहीं चाहिए। जिन बच्चों का नामकरण जन्म-पद के अक्षर से हुआ हो, उनकी दोनों राशियाँ एक ही होती हैं।

कौन सी राशि सही मानी जाए: नाम वाली या जन्म वाली?

जन्म का सही समय पता हो तो जन्म राशि ही प्रमुख है, क्योंकि दशा, कुंडली और विवाह मिलान सब चंद्रमा की असली जगह पर चलते हैं। नाम राशि तब काम आती है जब जन्म की जानकारी हाथ में न हो, जैसे रोज़ का राशिफल पढ़ते समय, या तब, जब परिवार को किसी का जन्म समय याद न हो। दोनों अलग निकलें तो घबराएँ नहीं; इसका मतलब बस इतना है कि नाम रखते समय जन्म नक्षत्र वाला अक्षर नहीं चुना गया।

जन्म तिथि के अनुसार बच्चे का नाम कैसे रखा जाता है?

परंपरा में नाम केवल तारीख से नहीं, जन्म नक्षत्र के चरण से तय होता है। बच्चे की कुंडली बनाकर देखा जाता है कि पैदा होने के क्षण चंद्रमा कहाँ था, यानी कौन सा नक्षत्र और कौन सा पद, और उस पद का अक्षर नाम की शुरुआत बनता है। उदाहरण: अनुराधा के चौथे पद का अक्षर “ने” है, इसलिए उस चरण में जन्मी बच्ची के लिए नेहा जैसा नाम चुना जा सकता है। चूँकि चंद्रमा कुछ घंटों में अगले पद में पहुँच जाता है, जन्म का समय जाने बिना सही अक्षर नहीं मिलता।

श, क्ष, त्र, ज्ञ से शुरू होने वाले नामों की राशि क्या है?

संयुक्त अक्षर वाले नाम उनके पहले व्यंजन से पढ़े जाते हैं। क्ष में क प्रधान है, इसलिए क्षितिज का अक्षर “की” बनता है और राशि मिथुन; त्र में त, सो त्रिशा का “ती” तुला देता है; ज्ञ में ज, सो ज्ञान के “जा” से मकर मिलती है। श और श्र का मामला अलग है, क्योंकि अवकहडा तालिका में श के लिए कोई अलग पद नहीं। यहाँ श को स गिना जाता है, जिससे श्रेया कुंभ में आती है, और ष वाली परंपरा के हिसाब से कन्या विकल्प के तौर पर दिखाई जाती है।

क्या नाम राशि से गुण मिलान हो सकता है?

हाँ, जब किसी एक पक्ष का जन्म समय मालूम न हो, तब नाम के अक्षरों से गुण मिलाने की परंपरा है। इसमें दोनों के नाम अक्षर से नक्षत्र पद और नाम राशि निकालकर अष्टकूट के कूट गिने जाते हैं। फिर भी इसे अनुमान ही समझें, क्योंकि यह पद्धति चंद्रमा की स्थिति के लिए बनी थी। अगर दोनों पक्षों का पूरा जन्म विवरण मौजूद है, तो कुंडली मिलान उसी से करवाएँ।

नाम से नक्षत्र कैसे पता करें?

नाम का पहला अक्षर पेज पर दी गई 27 नक्षत्रों वाली तालिका में खोजिए। तालिका में हर अक्षर अपने पद के साथ दर्ज है, इसलिए अक्षर मिलते ही नक्षत्र और उसका चरण दोनों सामने आ जाते हैं। क्षितिज का “की” मृगशिरा का चौथा पद है, गौरव का “गो” शतभिषा का पहला और नेहा का “ने” अनुराधा का चौथा। याद रखें, इस तरह मिला नक्षत्र नाम नक्षत्र है; जन्म नक्षत्र केवल जन्म कुंडली से निकलता है।

इन्हें भी देखें

स्रोत और गणना दस्तावेज़

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