हर महीने अपडेट · निरयण (लाहिड़ी) · Swiss Ephemeris
मासिक राशिफल नवंबर 2026: मेष से मीन तक
हर महीने आकाश की तस्वीर बदलती है: सूर्य एक नई राशि में कदम रखता है, अमावस्या और पूर्णिमा आती हैं, और बुध, शुक्र व मंगल आगे बढ़ते हैं, कभी-कभी वक्री भी होते हैं। यह पृष्ठ इन सब स्थितियों को आपकी राशि, यानी चंद्र राशि, से गिने गए भावों में रखकर बारहों राशियों का मासिक राशिफल तैयार करता है। नीचे अपनी राशि चुनें और देखें कि इस महीने कौन-सा क्षेत्र आगे रहेगा, कब कुछ शुरू करना ठीक है और कौन-सी तारीखें याद रखनी हैं।
सभी 12 राशियों का मासिक राशिफल, नवंबर 2026
मेष
महीने का विषय: विवाह और साझेदारीमेष राशिफल पढ़ेंवृषभ
महीने का विषय: दैनिक काम और स्वास्थ्यवृषभ राशिफल पढ़ेंमिथुन
महीने का विषय: प्रेम, रचनात्मकता और संतानमिथुन राशिफल पढ़ेंकर्क
महीने का विषय: घर, माता और सुखकर्क राशिफल पढ़ेंसिंह
महीने का विषय: पराक्रम, भाई-बहन और संवादसिंह राशिफल पढ़ेंकन्या
महीने का विषय: धन, परिवार और वाणीकन्या राशिफल पढ़ेंतुला
महीने का विषय: आप और आपका व्यक्तित्वतुला राशिफल पढ़ेंवृश्चिक
महीने का विषय: व्यय, विश्राम और भीतरी जीवनवृश्चिक राशिफल पढ़ेंधनु
महीने का विषय: लाभ, मित्र और इच्छाएँधनु राशिफल पढ़ेंमकर
महीने का विषय: कर्म, करियर और लक्ष्यमकर राशिफल पढ़ेंकुंभ
महीने का विषय: भाग्य, यात्रा और ज्ञानकुंभ राशिफल पढ़ेंमीन
महीने का विषय: साझा धन और गहरे बदलावमीन राशिफल पढ़ेंनवंबर 2026 का आकाश
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 6 नवंबर को 01:14 बजे | शुक्र वक्री होकर कन्या में लौटता है |
| 9 नवंबर को 12:32 बजे | अमावस्या (तुला) |
| 12 नवंबर को 20:12 बजे | मंगल का सिंह में गोचर |
| 13 नवंबर को 21:23 बजे | बुध मार्गी (तुला) |
| 14 नवंबर को 05:57 बजे | शुक्र मार्गी (कन्या) |
| 16 नवंबर को 19:40 बजे | सूर्य का वृश्चिक में गोचर |
| 22 नवंबर को 17:11 बजे | शुक्र का तुला में गोचर |
| 24 नवंबर को 20:24 बजे | पूर्णिमा (वृषभ) |
यह मासिक राशिफल कैसे बनता है
हर महीने की शुरुआत में उस महीने की ग्रह स्थितियाँ Swiss Ephemeris से निकाली जाती हैं और लाहिड़ी अयनांश घटाकर निरयण राशियों में बदली जाती हैं, जैसे भारतीय पंचांग में होता है। फिर आपकी चंद्र राशि को पहला भाव मानकर पूर्ण राशि पद्धति से बाकी भाव गिने जाते हैं। इसके बाद देखा जाता है कि सूर्य महीने का अधिकांश समय किस भाव में बिताता है, अमावस्या और पूर्णिमा किन भावों में पड़ती हैं, बुध, शुक्र और मंगल ज़्यादातर कहाँ रहते हैं और कोई ग्रह वक्री तो नहीं। हर स्थिति के लिए पहले से लिखे पाठों के संग्रह में से उसी भाव का पाठ चुना जाता है। इसीलिए एक ही महीने में हर राशि का पाठ अलग होता है, और कोई भी व्यक्ति हर महीने अंदाज़े से कुछ नहीं लिखता।
मासिक राशिफल का उपयोग कैसे करें
सबसे पहले महीने का विषय पढ़ें: सूर्य जिस भाव को रोशन करता है, वही क्षेत्र इन हफ्तों में सबसे अधिक ध्यान माँगता है। निरयण गणना में सूर्य लगभग महीने के बीच राशि बदलता है, जिसे संक्रांति कहते हैं, इसलिए दूसरे पखवाड़े में ध्यान अगले भाव की ओर खिसक सकता है। अमावस्या को आरंभ का बिंदु मानें और उसके आसपास कोई संकल्प लें या छोटा पहला कदम उठाएँ। पूर्णिमा पूर्णता का बिंदु है, जब मेहनत का फल दिखता है और पुरानी चीज़ छोड़ना आसान होता है। बुध बातचीत और कागज़ी काम, शुक्र प्रेम, आनंद और धन, तथा मंगल ऊर्जा और काम की दिशा बताते हैं। मुख्य तारीखों की तालिका अपने कैलेंडर में उतार लें और चंद्र के अनुकूल दिनों को ज़रूरी बातचीत या नई पहल के लिए चुनें।
राशि और लग्न: दोनों क्यों पढ़ें
वैदिक ज्योतिष में राशि का अर्थ है जन्म के समय चंद्रमा की राशि। इसे मन और भावनाओं की कुंजी माना जाता है, और यहाँ भाव इसी से गिने जाते हैं। लग्न वह राशि है जो जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित हो रही थी; यह औसतन दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए इसके लिए जन्म का सही समय और स्थान चाहिए। लग्न से गिने भाव काम, रिश्तों और बाहरी घटनाओं को अक्सर अधिक सटीकता से दिखाते हैं, जबकि चंद्र राशि बताती है कि आप उन्हें भीतर कैसे जीते हैं। अपना लग्न जानते हों तो उस नाम वाली राशि का मासिक राशिफल भी पढ़ें; दोनों में दोहराई गई बात को महीने का सबसे साफ़ संकेत मानें। राशि या लग्न मालूम न हो तो पहले जन्म कुंडली बना लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मासिक राशिफल हर महीने कब अपडेट होता है?
हर महीने की पहली तारीख को नया राशिफल अपने-आप तैयार हो जाता है। उसी समय नए महीने की ग्रह स्थितियाँ गणना से निकलती हैं और सभी राशियों के पाठ नए भावों के अनुसार बदल जाते हैं। इसके लिए किसी के लिखने का इंतज़ार नहीं होता। महीने के बीच सूर्य की संक्रांति या किसी ग्रह के राशि बदलने की तारीख पृष्ठ पर पहले से लिखी रहती है।
मेरी राशि पश्चिमी सूर्य राशि से अलग क्यों निकलती है?
इसके दो कारण हैं। पहला, यहाँ राशि का अर्थ चंद्र राशि है, सूर्य राशि नहीं। दूसरा, भारतीय ज्योतिष निरयण राशिचक्र मानता है, जबकि पश्चिमी ज्योतिष सायन राशिचक्र; आज दोनों में लगभग 24 अंश का अंतर है, जिसे अयनांश कहते हैं। यह पृष्ठ लाहिड़ी अयनांश का उपयोग करता है। अपनी सही राशि जानने के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान से कुंडली बनवाएँ।
दैनिक, मासिक और वार्षिक राशिफल में क्या अंतर है?
दैनिक राशिफल चंद्र गोचर पर टिका है, जो हर सवा दो दिन में भाव बदलता है, इसलिए वह मन के छोटे उतार-चढ़ाव दिखाता है। मासिक राशिफल सूर्य के भाव, अमावस्या, पूर्णिमा और बुध, शुक्र, मंगल को देखकर लगभग चार हफ्तों की दिशा बताता है। वार्षिक राशिफल गुरु, शनि, राहु-केतु और ग्रहणों जैसे धीमे चक्रों से पूरे साल की बड़ी तस्वीर बनाता है।
मासिक राशिफल में अमावस्या और पूर्णिमा का क्या अर्थ है?
अमावस्या पर सूर्य और चंद्र एक ही राशि में होते हैं। परंपरा में यह नए चक्र का आरंभ है, इसलिए जिस भाव में यह पड़ती है, वहाँ कुछ नया बोने का अच्छा समय माना जाता है। पूर्णिमा पर दोनों आमने-सामने होते हैं; उस भाव की बात चरम पर पहुँचती है, साफ़ दिखती है या पूरी होती है। ग्रहण पड़े तो पृष्ठ उसे अलग से बताता है।
संबंधित पृष्ठ
इन पाठों के पीछे अंदाज़ा नहीं, गणना है: महीने का आकाश Swiss Ephemeris से निकाला जाता है और ग्रह स्थितियाँ निरयण (लाहिड़ी अयनांश) में ली जाती हैं। राशि का अर्थ है आपकी चंद्र राशि, जो जन्म कुंडली में लिखी होती है; हर ग्रह इससे गिने गए जिस भाव में है, उसी के अनुसार पाठ चुना जाता है। यदि आपका लग्न ज्ञात है, तो उस राशि का पृष्ठ भी खोलकर देखें।