2027 का आकाश · लाहिड़ी अयनांश · Swiss Ephemeris से गणना
अमावस्या और पूर्णिमा 2027
सूर्य और चंद्र का एक पूरा चक्र लगभग साढ़े उनतीस दिन का होता है, और 2027 में इस लय से 13 अमावस्या और 12 पूर्णिमा बनती हैं। नीचे की तालिका हर अमावस्या और पूर्णिमा का खगोलीय क्षण भारतीय मानक समय (IST) में, लाहिड़ी अयनांश वाली निरयण राशि और अंश के साथ दिखाती है; जो चंद्र क्षण ग्रहण भी है, उस पर अलग चिह्न लगा है। इसी के सहारे महीने की लय बनाएँ: कब कोई शुरुआत करनी है और कब किसी काम को पूरा करके समेटना है।
| तारीख | घटना | राशि |
|---|---|---|
| 8 जनवरी को 01:54 बजे | अमावस्या (धनु) | 23°04′ धनु |
| 22 जनवरी को 17:47 बजे | पूर्णिमा (कर्क) | 8°00′ कर्क |
| 6 फ़रवरी को 21:26 बजे | अमावस्या (मकर) · ग्रहण | 23°23′ मकर |
| 21 फ़रवरी को 04:54 बजे | पूर्णिमा (सिंह) · ग्रहण | 7°52′ सिंह |
| 8 मार्च को 14:59 बजे | अमावस्या (कुंभ) | 23°20′ कुंभ |
| 22 मार्च को 16:14 बजे | पूर्णिमा (कन्या) | 7°21′ कन्या |
| 7 अप्रैल को 05:21 बजे | अमावस्या (मीन) | 22°43′ मीन |
| 21 अप्रैल को 03:57 बजे | पूर्णिमा (तुला) | 6°23′ तुला |
| 6 मई को 16:28 बजे | अमावस्या (मेष) | 21°28′ मेष |
| 20 मई को 16:29 बजे | पूर्णिमा (वृश्चिक) | 4°59′ वृश्चिक |
| 5 जून को 01:10 बजे | अमावस्या (वृषभ) | 19°44′ वृषभ |
| 19 जून को 06:15 बजे | पूर्णिमा (धनु) | 3°19′ धनु |
| 4 जुलाई को 08:32 बजे | अमावस्या (मिथुन) | 17°43′ मिथुन |
| 18 जुलाई को 21:15 बजे | पूर्णिमा (मकर) · ग्रहण | 1°34′ मकर |
| 2 अगस्त को 15:35 बजे | अमावस्या (कर्क) · ग्रहण | 15°41′ कर्क |
| 17 अगस्त को 12:59 बजे | पूर्णिमा (मकर) · ग्रहण | 29°58′ मकर |
| 31 अगस्त को 23:11 बजे | अमावस्या (सिंह) | 13°52′ सिंह |
| 16 सितंबर को 04:33 बजे | पूर्णिमा (कुंभ) | 28°38′ कुंभ |
| 30 सितंबर को 08:06 बजे | अमावस्या (कन्या) | 12°29′ कन्या |
| 15 अक्टूबर को 19:17 बजे | पूर्णिमा (मीन) | 27°44′ मीन |
| 29 अक्टूबर को 19:07 बजे | अमावस्या (तुला) | 11°40′ तुला |
| 14 नवंबर को 08:56 बजे | पूर्णिमा (मेष) | 27°17′ मेष |
| 28 नवंबर को 08:54 बजे | अमावस्या (वृश्चिक) | 11°25′ वृश्चिक |
| 13 दिसंबर को 21:38 बजे | पूर्णिमा (वृषभ) | 27°10′ वृषभ |
| 28 दिसंबर को 01:42 बजे | अमावस्या (धनु) | 11°35′ धनु |
अमावस्या और पूर्णिमा का उपयोग
अमावस्या पर सूर्य और चंद्र एक ही राशि में मिलते हैं; चाँद नहीं दिखता और अमांत पंचांग में नया चंद्र मास यहीं से शुरू होता है। कई लोग इस समय संकल्प लिखते हैं या नई योजना का पहला छोटा कदम उठाते हैं। लगभग पंद्रह दिन बाद पूर्णिमा पर दोनों आमने-सामने की राशियों में होते हैं, और जो बोया था वह दिखने लगता है: परिणाम, प्रतिक्रिया या कोई दबी भावना। यह पूरा करने, आभार जताने और बोझ उतारने का स्वाभाविक बिंदु है। चंद्र की राशि विषय तय करती है: वृषभ की अमावस्या धन और स्थिरता की ओर, तुला की पूर्णिमा रिश्तों और समझौतों की ओर ध्यान ले जाती है। जन्म कुंडली में लिखी अपनी चंद्र राशि से वह भाव गिनें, तो दिखता है कि यह विषय जीवन में कहाँ उतरता है।
2027 की चंद्र लय
धनु राशि को इस वर्ष दो अमावस्या मिलती हैं, एक जनवरी की शुरुआत में और एक दिसंबर के आखिरी सप्ताह में, इसलिए वर्ष एक ही राशि के स्वर से खुलता और बंद होता है। मकर में लगातार दो पूर्णिमा आती हैं, 18 जुलाई और 17 अगस्त को, और दोनों उपच्छाया चंद्र ग्रहण हैं, जबकि मिथुन में 2027 की कोई पूर्णिमा नहीं पड़ती। अगस्त सबसे भरा हुआ महीना है: 2 अगस्त की कर्क अमावस्या पूर्ण सूर्य ग्रहण है, बीच में मकर की ग्रहण वाली पूर्णिमा आती है और 31 अगस्त को सिंह राशि में दूसरी अमावस्या पड़ती है, जिसे कभी-कभी “ब्लैक मून” कहा जाता है। कुल पाँच चंद्र क्षण ग्रहण हैं, और इन दिनों को सामान्य चंद्र से ज़्यादा ठहराव देना समझदारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2027 में कितनी अमावस्या और कितनी पूर्णिमा हैं?
IST के अनुसार 2027 में 13 अमावस्या और 12 पूर्णिमा हैं। अतिरिक्त अमावस्या अगस्त से आती है, जिसमें दो अमावस्या हैं: 2 अगस्त को कर्क राशि में, जो पूर्ण सूर्य ग्रहण भी है, और महीने के आखिरी दिन सिंह में। बाकी हर महीने में एक अमावस्या और एक पूर्णिमा है, इसलिए पूरे वर्ष चंद्र की मासिक लय लगभग एक समान चलती है।
पंचांग में अमावस्या या पूर्णिमा की तारीख एक दिन अलग क्यों दिखती है?
तालिका खगोलीय क्षण IST में दिखाती है, और यही क्षण अमावस्या या पूर्णिमा तिथि का अंत होता है। व्रत और पर्व की तारीख पंचांग में उस तिथि से तय होती है जो आपके स्थान पर सूर्योदय के समय चल रही हो; कुछ व्रतों के अपने नियम भी हैं। इसलिए पंचांग की तारीख तालिका से एक दिन आगे या पीछे हो सकती है, और व्रत के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
2027 की कौन-सी अमावस्या और पूर्णिमा ग्रहण भी हैं?
कुल पाँच। फरवरी में मकर की अमावस्या वलयाकार सूर्य ग्रहण बनती है और उसके बाद की सिंह पूर्णिमा उपच्छाया चंद्र ग्रहण। जुलाई और अगस्त की मकर पूर्णिमाओं में भी चंद्र हल्का मद्धिम होता है, यानी दोनों उपच्छाया ग्रहण हैं, और इन दोनों के बीच की कर्क अमावस्या पूर्ण सूर्य ग्रहण है। तालिका में ऐसी पंक्तियों पर ग्रहण का अलग निशान लगा है।
अगस्त 2027 का “ब्लैक मून” क्या होता है?
एक ही कैलेंडर महीने की दूसरी अमावस्या को कभी-कभी ब्लैक मून कहा जाता है। IST के अनुसार 2027 में यह 31 अगस्त की रात 23:11 पर सिंह राशि की अमावस्या है। यह कोई आधिकारिक खगोलीय शब्द नहीं, बल्कि पश्चिम में प्रचलित एक लोकप्रिय नाम है, और पूर्व के कुछ समय क्षेत्रों में यही क्षण 1 सितंबर को पड़ता है, इसलिए यह नाम स्थान पर निर्भर करता है।
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तारीखें और समय भारतीय मानक समय (IST) में दिए गए हैं। ग्रह स्थितियाँ Swiss Ephemeris से निरयण पद्धति (लाहिड़ी अयनांश) में निकाली गई हैं।