2027 का आकाश · लाहिड़ी अयनांश · Swiss Ephemeris से गणना

वृषभ राशिफल 2027

कलम, आँगन और दूर का क्षितिज: वृषभ राशि का 2027 इन्हीं तीन धागों से बुना है। जिनकी जन्म कुंडली में चंद्रमा वृषभ में है, उनके लिए पहला भाव वृषभ ही है। उच्च का गुरु पहले छह महीनों के बड़े हिस्से में तीसरे भाव में हिम्मत और लेखन को बल देता है, फिर नवंबर तक चौथे में घर-परिवार को सँवारता है। राहु नवम भाव में भाग्य, उच्च शिक्षा और विदेश की चाह बढ़ाता है, जबकि केतु तीसरे भाव में कम पर सार्थक बोलना सिखाता है। जून से अक्टूबर तक बारहवें भाव का शनि साढ़े साती का पहला स्पर्श लाता है।

2027 एक नज़र में

गुरु
सिंह · भाव 4 (1 जन॰ – 25 जन॰) → कर्क · भाव 3 (25 जन॰ – 26 जून) → सिंह · भाव 4 (26 जून – 26 नव॰) → कन्या · भाव 5 (26 नव॰ – 31 दिस॰)
शनि
मीन · भाव 11 (1 जन॰ – 3 जून) → मेष · भाव 12 (3 जून – 20 अक्टू॰) → मीन · भाव 11 (20 अक्टू॰ – 31 दिस॰)
शनि की स्थिति
साढ़े साती या ढैय्या नहीं (1 जन॰ – 3 जून) → साढ़े साती · पहला चरण (3 जून – 20 अक्टू॰) → साढ़े साती या ढैय्या नहीं (20 अक्टू॰ – 31 दिस॰)
राहु-केतु
राहु: मकर · भाव 9; केतु: कर्क · भाव 3
ग्रहण
6 फ़र॰: भाव 9 · 21 फ़र॰: भाव 4 · 18 जुल॰: भाव 9 · 2 अग॰: भाव 3 · 17 अग॰: भाव 9
बुध वक्री
9 फ़र॰: भाव 10 → भाव 9 · 10 जून: भाव 2 · 7 अक्टू॰: भाव 6 → भाव 5
आपकी राशि में शुक्र
4 जून – 28 जून

प्रेम और संबंध

वृषभ का राशि स्वामी शुक्र इस साल एक बार भी वक्री नहीं होता, और जून के ज़्यादातर हिस्से में आपकी अपनी राशि में रहकर आकर्षण, सौम्यता और मेल-जोल बढ़ाता है; अहम बात कहने के लिए यह अच्छी खिड़की है। सातवें भाव का स्वामी मंगल साल के शुरुआती तीन महीनों में वक्री होकर चौथे से तीसरे भाव में लौटता है, इसलिए साथी के साथ घर या ससुराल को लेकर पुरानी बहस फिर उठ सकती है; जवाब से पहले पूरी बात सुनें। फरवरी के अंत का उपच्छाया चंद्र ग्रहण चौथे भाव में घरेलू भावनाओं को उभारता है। अक्टूबर का बुध वक्री छठे से पाँचवें भाव में लौटता है, जिससे कोई पुराना प्रेम प्रसंग याद आ सकता है। नवंबर के अंत में गुरु पाँचवें भाव में आकर प्रेम और संतान के मामलों में गर्मजोशी लाता है।

करियर और कामकाज

वृषभ राशि के लिए शनि योगकारक माना जाता है, क्योंकि वह नवम और दशम दोनों भावों का स्वामी है। साल के पहले पाँच महीने और अक्टूबर के उत्तरार्ध के बाद वह ग्यारहवें भाव में रहकर टीम, वरिष्ठ संपर्कों और लंबी योजनाओं से धीरे-धीरे फल देता है। बीच के महीनों में, जब शनि मेष यानी बारहवें भाव में होता है, पर्दे के पीछे के काम, विदेशी ग्राहकों या दूर बैठी टीमों से जुड़े दायित्व बढ़ सकते हैं। फरवरी का बुध वक्री दशम भाव से नवम की ओर लौटता है: पदोन्नति की बातचीत, रिपोर्ट और यात्रा के कागज़ों में हर शब्द जाँचें। राहु और तीन ग्रहण नवम भाव में हैं, तो उच्च प्रशिक्षण, कोई प्रमाणपत्र या अनुभवी मार्गदर्शक करियर की दिशा मोड़ सकता है। अक्टूबर में छठे भाव से शुरू होने वाला बुध वक्री कार्यस्थल की प्रक्रियाएँ सुधारने का मौका है।

धन और संसाधन

पैसे के लिए लाभ-भाव, यानी ग्यारहवाँ भाव अहम है, जहाँ शनि साल के बड़े हिस्से में नियमित मेहनत से धीमी पर स्थिर आमदनी का संकेत देता है। जून में बुध धन और वाणी के दूसरे भाव में वक्री होता है; बैंक के कागज़, परिवार का बजट और पैसों से जुड़े वादे उन हफ्तों में दोबारा मिलाएँ। बीच के चार-पाँच महीनों में व्यय-भाव में बैठा शनि यात्रा, दान या अचानक आए खर्चों पर हाथ खुलवा सकता है, इसलिए एक अलग खर्च-सूची रखें। दूसरी छमाही में चौथे भाव का गुरु घर या वाहन के खर्च योजनाबद्ध करने में सहारा देता है।

गुरु गोचर: कहाँ बढ़त मिलती है

सिंह · भाव 4 (1 जन॰ – 25 जन॰) → कर्क · भाव 3 (25 जन॰ – 26 जून) → सिंह · भाव 4 (26 जून – 26 नव॰) → कन्या · भाव 5 (26 नव॰ – 31 दिस॰)

वृषभ राशि के लिए आठवें और ग्यारहवें भाव का स्वामी गुरु इस साल तीन पड़ावों से गुज़रता है। जनवरी के अंतिम सप्ताह में वक्री गुरु सिंह छोड़कर कर्क, यानी आपके तीसरे भाव में पहुँचता है और उच्च का होकर पराक्रम, लेखन, छोटी यात्राओं और भाई-बहनों के रिश्तों को बल देता है। अप्रैल के मध्य तक कोई पुराना कोर्स या टला हुआ लेखन फिर उठाएँ, मार्गी होने के बाद उसे पूरा करें। जून के अंत से नवंबर तक गुरु चौथे भाव में घर, माता, वाहन और मन की शांति पर ध्यान रखता है; वहाँ से उसकी सातवीं दृष्टि दशम भाव पर पड़कर करियर को सहारा देती है। तीसरा पड़ाव कन्या है, जो वृषभ से पाँचवाँ भाव है: नवंबर के अंत से वहाँ गुरु संतान, पढ़ाई और प्रेम को आशीर्वाद देता है।

शनि गोचर, साढ़े साती और ढैय्या

साढ़े साती या ढैय्या नहीं (1 जन॰ – 3 जून) → साढ़े साती · पहला चरण (3 जून – 20 अक्टू॰) → साढ़े साती या ढैय्या नहीं (20 अक्टू॰ – 31 दिस॰)

वृषभ राशि के लिए 2027 का शनि दो रूपों में दिखता है। पहले पाँच महीने वह मीन, यानी ग्यारहवें भाव में रहता है; इन महीनों में वृषभ राशि शनि की साढ़े साती और ढैय्या, दोनों से मुक्त है, और मित्रों तथा लंबी योजनाओं से जुड़ी मेहनत धीरे-धीरे फल देती है। जून में शनि मेष में, आपके बारहवें भाव में प्रवेश करता है, और अक्टूबर तक साढ़े साती का पहला चरण गिना जाता है: नींद, एकांत, विदेश से जुड़े काम और खर्चों को अनुशासित करने का समय। अगस्त से उल्टी चाल चलता शनि अक्टूबर में मीन में वापस आता है, और तब साढ़े साती की यह शुरुआती झलक हट जाती है। इसे आगे के लंबे दौर की पूर्व-तैयारी मानें: खर्च की आदतें, आराम और भीतरी स्पष्टता अभी से सँवारें।

ग्रहण और राहु-केतु

6 फ़र॰: भाव 9 · 21 फ़र॰: भाव 4 · 18 जुल॰: भाव 9 · 2 अग॰: भाव 3 · 17 अग॰: भाव 9

राहु मकर में नवम और केतु कर्क में तीसरे भाव में साल भर टिके हैं। यह धुरी वृषभ राशि को पड़ोस से आगे भाग्य, गुरुजनों और दूर की यात्राओं की ओर खींचती है। फरवरी का वलयाकार सूर्य ग्रहण नवम भाव में पढ़ाई, आस्था या विदेश की किसी योजना की नींव डालता है; गर्मियों के दो उपच्छाया चंद्र ग्रहण उसी भाव में प्रगति परखते हैं। सिंह का उपच्छाया ग्रहण फरवरी के अंत में सुख-भाव की भावनाएँ छूता है। अगस्त में कर्क का पूर्ण सूर्य ग्रहण पराक्रम-भाव को छूकर भाई-बहनों से संवाद और अपने प्रयासों की दिशा बदल सकता है। पंचांग परंपरा में उपच्छाया ग्रहणों का सूतक प्रायः नहीं गिना जाता; सूर्य ग्रहणों का सूतक और दिखना जगह के हिसाब से बदलता है, सो यात्रा से पहले स्थानीय पंचांग जाँचें।

बुध और मंगल वक्री

9 फ़र॰: भाव 10 → भाव 9 · 10 जून: भाव 2 · 7 अक्टू॰: भाव 6 → भाव 5

वृषभ राशि के लिए बुध दूसरे और पाँचवें भाव का स्वामी है, सो उसकी तीनों वक्री अवधियाँ पैसा, वाणी और रचनात्मकता को छूती हैं। फरवरी में दशम से नवम भाव की ओर वापसी दफ्तर की ईमेल, उच्च शिक्षा के आवेदन और यात्रा के टिकटों में दोहरी जाँच माँगती है। जून में वक्री बुध धन-भाव में है: परिवार में कही बात और खर्च का हिसाब, दोनों साफ रखें। अक्टूबर की छठे से पाँचवें भाव तक की वापसी दिनचर्या सुधारने और कोई पुराना शौक जगाने के लिए उपयुक्त है। सातवें और बारहवें भाव का स्वामी मंगल पहली तिमाही में चौथे से तीसरे भाव में वक्री रहता है; घर की मरम्मत या भाई-बहनों से बहस में जल्दी न करें। आपका राशि स्वामी शुक्र पूरे साल मार्गी रहता है।

2027: तिमाही दर तिमाही

जनवरी–मार्च

साल की पहली तिमाही में उच्च का गुरु वक्री होकर आपके तीसरे भाव में आता है, जहाँ केतु पहले से बैठा है, इसलिए लेखन, कोर्स या छोटे सफर की योजनाएँ बार-बार बदल सकती हैं। फरवरी में नवम भाव का सूर्य ग्रहण और दशम से नवम भाव का बुध वक्री करियर और पढ़ाई की दिशा पर पुनर्विचार कराते हैं। करके देखें: मार्च तक किसी बड़ी यात्रा या दाखिले की बुकिंग से पहले हर दस्तावेज़ की प्रति अपने पास रखें।

अप्रैल–जून

मंगल और गुरु के मार्गी होने से अप्रैल में रुके हुए काम खुलने लगते हैं। मई के मध्य की वृषभ संक्रांति से सूर्य आपकी राशि में आता है, जून की शुरुआत में वृषभ अमावस्या नए संकल्प का दिन है और लगभग पूरा जून शुक्र भी साथ है। इसी बीच बारहवें भाव में शनि साढ़े साती का पहला चरण शुरू करता है, और जून का बुध वक्री धन-भाव में है। छोटा कदम: संक्रांति वाले महीने में अगले छह महीनों का बजट लिख लें।

जुलाई–सितंबर

जुलाई से सितंबर तक गुरु चौथे भाव में घर-परिवार को केंद्र में रखता है; मरम्मत, सजावट या माता के साथ समय बिताने के लिए यह अच्छा दौर है। मकर के दो उपच्छाया ग्रहण, एक जुलाई में और एक अगस्त में, नवम भाव में पढ़ाई और यात्रा की योजनाएँ परखते हैं, जबकि अगस्त के आरंभ में पड़ता पूर्ण सूर्य ग्रहण पराक्रम-भाव में संवाद का ढंग बदलता है। अगस्त में बारहवें भाव का शनि वक्री होता है। ध्यान रखें: भाई-बहनों से कोई पुराना मुद्दा आमने-सामने सुलझाएँ।

अक्टूबर–दिसंबर

अक्टूबर में बुध छठे से पाँचवें भाव में वक्री होता है, जो दफ्तर की प्रक्रियाएँ सुधारने और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी योजना दोबारा देखने का समय है। उसी महीने शनि मीन लौटता है और साढ़े साती का शुरुआती चरण हट जाता है। नवंबर खत्म होते-होते गुरु कन्या में आकर संतान-भाव को रोशन करता है, और दिसंबर की वृषभ पूर्णिमा साल के भावनात्मक हिसाब का पल है। आख़िरी सलाह: उस पूर्णिमा पर इस साल की तीन सीखें लिखें।

2027 की आपकी मुख्य तारीखें

तारीखघटनाआपका भाव
10 जनवरी को 18:29 बजेमंगल वक्री (सिंह)भाव 4
25 जनवरी को 02:12 बजेगुरु वक्री होकर कर्क में लौटता हैभाव 3
6 फ़रवरी को 21:29 बजेवलयाकार सूर्य ग्रहण (मकर)भाव 9
9 फ़रवरी को 23:06 बजेबुध वक्री (कुंभ)भाव 10
21 फ़रवरी को 04:42 बजेउपच्छाया चंद्र ग्रहण (सिंह)भाव 4
3 मार्च को 18:02 बजेबुध मार्गी (मकर)भाव 9
1 अप्रैल को 19:38 बजेमंगल मार्गी (कर्क)भाव 3
13 अप्रैल को 07:41 बजेगुरु मार्गी (कर्क)भाव 3
6 मई को 12:34 बजेबुध का आपकी राशि में प्रवेश—
15 मई को 12:15 बजेसूर्य का आपकी राशि में प्रवेश (संक्रांति)—
3 जून को 04:43 बजेशनि का मेष में गोचरभाव 12
4 जून को 00:38 बजेशुक्र का आपकी राशि में प्रवेश—
5 जून को 01:10 बजेअमावस्या (वृषभ)भाव 1
10 जून को 23:45 बजेबुध वक्री (मिथुन)भाव 2
26 जून को 04:50 बजेगुरु का सिंह में गोचरभाव 4
5 जुलाई को 01:09 बजेबुध मार्गी (मिथुन)भाव 2
18 जुलाई को 21:33 बजेउपच्छाया चंद्र ग्रहण (मकर)भाव 9
2 अगस्त को 15:36 बजेपूर्ण सूर्य ग्रहण (कर्क)भाव 3
9 अगस्त को 23:36 बजेशनि वक्री (मेष)भाव 12
17 अगस्त को 12:43 बजेउपच्छाया चंद्र ग्रहण (मकर)भाव 9
7 अक्टूबर को 20:07 बजेबुध वक्री (तुला)भाव 6
20 अक्टूबर को 08:13 बजेशनि वक्री होकर मीन में लौटता हैभाव 11
28 अक्टूबर को 19:40 बजेबुध मार्गी (कन्या)भाव 5
26 नवंबर को 18:07 बजेगुरु का कन्या में गोचरभाव 5
13 दिसंबर को 21:38 बजेपूर्णिमा (वृषभ)भाव 1
24 दिसंबर को 08:17 बजेशनि मार्गी (मीन)भाव 11

भाव आपकी राशि, यानी चंद्र राशि से गिने जाते हैं: जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था, वही पहला भाव है, और आपकी जन्म कुंडली में यही राशि लिखी होती है। लग्न पता हो तो उस राशि का राशिफल भी पढ़ें। कुंडली मिलान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वृषभ राशि वालों का 2027 कुल मिलाकर कैसा बीतेगा?

वृषभ राशि के लिए यह सीखने, घर सँवारने और भाग्य के नए रास्ते तलाशने का साल है। गुरु पहले तीसरे भाव में हिम्मत और संवाद बढ़ाता है, फिर चौथे भाव में घरेलू सुख देता है। राहु और तीन ग्रहण नवम भाव में पढ़ाई, यात्रा और मार्गदर्शकों को अहम बनाते हैं। शनि ज़्यादातर समय लाभ-भाव में रहकर स्थिर प्रगति का संकेत देता है।

2027 में वृषभ राशि के प्रेम संबंध कैसे रहेंगे?

राशि स्वामी शुक्र पूरे साल मार्गी है और जून में आपकी राशि में रहकर आकर्षण बढ़ाता है, जो रिश्ते की अहम बातचीत के लिए अच्छा समय है। साल की शुरुआत में वक्री मंगल साथी से घरेलू मुद्दों पर पुरानी बहस लौटा सकता है। अक्टूबर में कोई पुरानी याद ताज़ा हो सकती है, और नवंबर के अंत से पाँचवें भाव का गुरु प्रेम में गर्मजोशी लाता है।

वृषभ राशि के लिए साल के कौन-से महीने सबसे खास हैं?

फरवरी में नवम भाव का वलयाकार सूर्य ग्रहण पढ़ाई, यात्रा और भाग्य से जुड़ी योजनाओं को नई दिशा देता है। जून सबसे भरा महीना है: वृषभ अमावस्या, आपकी राशि में शुक्र, धन-भाव में बुध वक्री और शनि का बारहवें भाव में प्रवेश। अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण छोटे भाई-बहनों और संवाद के भाव को छूता है, और अक्टूबर में शनि मीन लौटता है।

क्या 2027 में वृषभ राशि पर साढ़े साती शुरू हो जाएगी?

केवल अस्थायी रूप से। शनि जून के पहले हफ्ते में मेष, यानी वृषभ से बारहवीं राशि में पहुँचता है और अक्टूबर के उत्तरार्ध तक वहीं रहता है; इन महीनों में साढ़े साती का पहला चरण माना जाता है। वक्री होकर मीन लौटने के बाद साल के बचे हिस्से में वृषभ राशि साढ़े साती और ढैय्या से बाहर रहती है। इसे शांत तैयारी का संकेत मानें।

सभी 12 राशियों का राशिफल 2027

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